चंडीगढ़, 27 सितंबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्री अशोक सिंहल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा, अपना समय और अपना संपूर्ण जीवन भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने के लिए समर्पित कर दिया। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में भी उन्होंने व्यापक जनसंपर्क और संगठन के माध्यम से इस आंदोलन को देश के अनेक भागों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने ये बातें रविवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष के उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में अशोक सिंहल जी पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
समारोह में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, सोहना के विधायक तेजपाल तंवर, पटौदी की विधायक बिमला चौधरी, गुरुग्राम विधायक मुकेश शर्मा और मेयर नगर निगम गुरुग्राम राजरानी मल्होत्रा उपस्थित रहीं।
*युवाओं के लिए प्रेरणा है अशोक सिंहल जी का जीवन*
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ महापुरुषों का जीवन ऐसा होता है, जिनकी प्रेरणा समय के साथ और गहरी होती जाती है। उनके आदर्श भावी पीढ़ियों को दिशा देते हैं और उनके त्याग से समाज को शक्ति मिलती है। अशोक सिंहल जी का जीवन युवाओं के लिए भी बड़ी सीख है। उन्होंने व्यक्तिगत उन्नति के अवसरों के बजाय अपने ज्ञान और सामर्थ्य को समाज के काम में लगाने का रास्ता चुना।
*सांस्कृतिक एकता और सामाजिक जुड़ाव को दिया महत्व*
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अशोक सिंहल जी ने संतों, धर्माचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामान्य परिवारों को व्यापक सांस्कृतिक उद्देश्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की भाषाओं, पहनावे और परंपराओं में विविधता होने के बावजूद सांस्कृतिक आत्मीयता का भाव हमारी विशेषता है। अशोक सिंहल जी के जीवन से आपसी संवाद बढ़ाने, विश्वास मजबूत करने और समाज में सहयोग की भावना विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
*भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का युवाओं से आह्वान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी परंपराओं को समझना, प्रश्न पूछना, मूल ग्रंथों को पढ़ना और विद्वानों से संवाद करना युवाओं के व्यक्तित्व को समृद्ध करता है। अपनी विरासत का ज्ञान आत्मविश्वास देता है और दुनिया से सीखने तथा दुनिया को कुछ नया देने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि मजबूत जड़ों वाला वृक्ष ही आकाश की ओर ऊंचा उठता है।
*जन्म शताब्दी कार्यक्रमों को सेवा कार्यों से जोड़ने का आग्रह*
मुख्यमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद और सामाजिक संस्थाओं से जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को सेवा के कार्यों से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग, रक्तदान, जरूरतमंद परिवारों तक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने, पौधरोपण और लगाए गए पौधों की देखभाल करने तथा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए संवाद जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही।
*सांस्कृतिक गौरव के साथ अच्छे आचरण का संदेश*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंहल जी की स्मृति में आयोजित यह समारोह समाज के प्रति अपने दायित्व को ईमानदारी से निभाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से अपने कौशल को निखारने, शिक्षकों से बच्चों में संस्कार जगाने, उद्यमियों से रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक संगठनों से जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा सांस्कृतिक गौरव हमारे अच्छे आचरण में दिखाई देना चाहिए और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे आसपास कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
* अशोक सिंहल जी के सपनों को पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि — आचार्य लोकेश मुनि*
आचार्य लोकेश मुनि ने अशोक सिंहल जी के जीवन और उनके संकल्पों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका सपना अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का भव्य निर्माण देखना था। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण अशोक सिंहल जी के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े उनके संकल्पों को आगे बढ़ाना ही अशोक सिंघल जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके विचारों और संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए भारतीय संस्कृति, आस्था और विरासत के प्रति जागरूकता को मजबूत करना समाज की जिम्मेदारी है।
समारोह में केंद्रीय महामंत्री विश्व हिन्दू परिषद बजरंग लाल बागड़ा, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर संजय कौशिक, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष राधेश्याम चिलाना सहित अन्य पदाधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और युवा उपस्थित रहे।


