धूरी, 7 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां कहा कि पंजाब सरकार द्वारा लाल लकीर के अंदर बने मकानों के मालिकाना हक देने से लोगों का दशकों पुराना इंतजार खत्म हो गया है। उन्होंने ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत परिवारों को संपत्ति के मालिकाना हक संबंधी प्रमाण पत्र सौंपते हुए इसे ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत बताया, जो लोगों को कानूनी रूप से दर्ज मालिकाना हक, सीमांकन के नक्शे और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ गरीबों, दलितों और भूमिहीन परिवारों को मिलेगा, जिनके मकान पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। दूसरी ओर, सही नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड से लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति संबंधी विवादों को निपटाने में मदद मिलेगी। धूरी में मालिकाना हक प्रमाण पत्र वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही लगभग 4,000 गांवों में संपत्तियों की रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, “धूरी रैली के भारी जनसमूह ने साबित कर दिया है कि हमारे कामों की गूंज पंजाब के घर-घर में सुनाई दे रही है। परिवारवाद की राजनीति खत्म करके हमने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है।” उन्होंने कहा कि लगभग 4,000 गांवों को जल्द ही संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्रियां मिलेंगी। उन्होंने आगे कहा कि धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट तोहफे के रूप में दिया गया है। उन्होंने कहा कि खेती योग्य 88 प्रतिशत भूमि और टेलों तक नहरी पानी पहुंचने से हमारे किसानों की फसल पैदावार बढ़ी है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पंजाब का अग्रणी होना तथा शून्य बिजली बिल अब जमीनी हकीकत बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य निस्वार्थ भाव से पंजाब की सेवा करना है और पंजाबी किसी की धौंस बर्दाश्त नहीं करते। इंकलाब जिंदाबाद।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य हर योग्य परिवार को उसके अपने घर का स्पष्ट मालिकाना हक और दस्तावेजी मान्यता देना है। हमारा संकल्प है कि हर योग्य परिवार का घर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उसे मालिकाना हक की पुष्टि करने वाला दस्तावेज मिले। यह प्रयास लोगों के अधिकारों, स्वाभिमान और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करेगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “धूरी रैली के विशाल जनसमूह ने साबित कर दिया है कि हमारे कामों की गूंज पंजाब के घर-घर में है। परिवारवाद की राजनीति खत्म करके हमने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। लगभग 4,000 गांवों में जल्द ही पक्की रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।”
उन्होंने कहा, “अपने घर का मालिकाना हक हर परिवार की भावनाओं, आकांक्षाओं और भविष्य की उम्मीदों से गहराई से जुड़ा होता है। अपने घर का स्पष्ट मालिकाना रिकॉर्ड होने से परिवार में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना पैदा होती है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब का कोई भी योग्य परिवार अपने घर के मालिकाना हक को लेकर असुरक्षित महसूस न करे।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “गांवों में कई परिवार पीढ़ियों से लाल लकीर के अंदर अपने घरों में रह रहे हैं और औपचारिक मालिकाना रिकॉर्ड न होने के कारण उन्हें अक्सर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जिस घर में परिवार की कई पीढ़ियां रही हों, उसका स्पष्ट मालिकाना दस्तावेज होना बेहद जरूरी है। इसलिए ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का प्रमुख उद्देश्य योग्य परिवारों को उनके घरों की कानूनी मान्यता प्रदान करना है।”
इस योजना को जनहितैषी पहल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को उनके घरों के मालिकाना हक के दस्तावेज देकर यह योजना संपत्ति के आधिकारिक रिकॉर्ड में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रॉपर्टी कार्ड परिवार को यह भरोसा देता है कि उनके घर की पहचान और मालिकाना हक से संबंधित विवरण आधिकारिक रूप से दर्ज हो चुके हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के तहत संपत्तियों की निशानदेही और नक्शे तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वेक्षण के माध्यम से घरों की स्थिति और सीमाओं की पहचान की जा रही है तथा स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से स्थापित करना और संपत्ति के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाना है, ताकि भविष्य में स्वामित्व को लेकर कोई भ्रम न रहे।”
उन्होंने कहा, “प्रॉपर्टी कार्ड जारी होने से योग्य लाभार्थियों को अपने घरों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेजी मान्यता और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। घरों की सीमाओं और स्वामित्व के स्पष्ट रिकॉर्ड से आपसी गलतफहमियों और संपत्ति विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि औपचारिक प्रॉपर्टी रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है, लेकिन ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक के नियमों और पात्रता शर्तों पर ही निर्भर करेगी।”
उन्होंने कहा कि इस पहल से लोगों को अपने घरों के रखरखाव और सुधार के साथ-साथ अपने परिवारों के लिए भविष्य की योजना बनाने के लिए अधिक विश्वास मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस योजना का लाभ हर योग्य परिवार तक पहुंचे और उनके घरों से संबंधित स्वामित्व के रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से तैयार किए जाएं।’’
लाभार्थियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘मैं सभी लाभार्थियों से अपील करता हूं कि वे अपने प्रॉपर्टी कार्ड पर दर्ज नाम, घर के विवरण और अन्य जानकारी की ध्यानपूर्वक जांच करें। किसी भी गलती या अस्पष्टता की स्थिति में उन्हें यह मामला संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाना चाहिए।’’
चरणबद्ध वितरण के बारे में विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पहले चरण में पंजाब भर के 2295 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरित करने का प्रस्ताव है, जिसमें संगरूर जिले के 221 गांव शामिल हैं। दूसरे चरण में पंजाब भर के 1,668 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जाएंगे। तीसरा चरण नवंबर में और चौथा दिसंबर में शुरू होगा।’’
उन्होंने कहा कि यह चरणबद्ध वितरण इसलिए तैयार किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रॉपर्टी कार्ड अधिक से अधिक योग्य लाभार्थियों तक सुचारू और व्यवस्थित ढंग से पहुंचें। उन्होंने कहा, ‘‘मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे सर्वेक्षण, रिकॉर्डों के सत्यापन और प्रॉपर्टी कार्डों के वितरण के दौरान संबंधित टीमों का सहयोग करें। जनहितैषी योजना ‘मिशन मोड’ के तहत लागू की जा रही है और इस वर्ष के अंत तक पूरे राज्य को इसके दायरे में लाया जाएगा।’’
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘हमने धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट तोहफे के रूप में दिया है। नहरी पानी को कृषि योग्य भूमि के 88 प्रतिशत हिस्से तक, विशेष रूप से टेलों तक पहुंचाया गया है, जिससे हमारे किसानों की फसल की पैदावार में वृद्धि हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में पंजाब का पहले नंबर पर होना और बिजली के बिल शून्य होना अब हकीकत बन चुका है।’’
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब की निस्वार्थ सेवा करना है और पंजाबी किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
परिवारों को सुरक्षित स्वामित्व अधिकार देने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया
‘मेरा घर मेरे नाम’ का महत्व केवल एक प्रॉपर्टी कार्ड सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन घरों के लिए आधिकारिक स्वामित्व अधिकारों का प्रमाणित रिकॉर्ड (वेरीफाएबल रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) तैयार करने में है, जो ऐतिहासिक रूप से औपचारिक राजस्व रिकॉर्ड से बाहर थे। इस प्रक्रिया के तहत अधिसूचित आबादी क्षेत्र के प्रत्येक घर और प्लॉट का सर्वेक्षण और मैपिंग आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाती है, जिसमें ड्रोन मैपिंग भी शामिल है। जबकि मालिक की पहचान पटवारी या सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा गांव स्तरीय समिति की मौजूदगी में घर-घर जाकर की जाती है। ड्राफ्ट नक्शा और स्वामित्व संबंधी विवरण गांव में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं और पंचायत के साथ साझा किए जाते हैं, जबकि रिकॉर्ड को अंतिम रूप देने से पहले सुधारों की मांग करने के लिए मालिकों को पुष्टि के लिए व्हाट्सऐप पर उनके विवरण प्राप्त होते हैं। यह पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया परिवारों को अधिकारों के अंतिम रिकॉर्ड का हिस्सा बनने से पहले अपने स्वामित्व संबंधी विवरणों की जांच करने का अवसर देती है।
एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद स्वामित्व अधिकारों के रिकॉर्ड को औपचारिक रूप से प्रमाणित किया जाता है और इससे प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किया जाता है। कार्ड में ऑनलाइन सत्यापन के लिए सर्वेक्षण यूनिट नंबर, जीपीएस लोकेशन, ड्रोन मैप और क्यूआर कोड होता है, जिससे परिवार को उसकी संपत्ति का एक दस्तावेजी और प्रमाणित रिकॉर्ड मिलता है। यह विशेष रूप से गरीब और अनुसूचित जाति परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास आबादी से बाहर कोई जमीन नहीं है और जिनके लिए घर ही उनकी एकमात्र संपत्ति हो सकती है। यह औपचारिक मान्यता स्वामित्व की अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है, संपत्ति की सीमाओं को दुरुस्त करने और विवादों को कम करने में मदद कर सकती है, जबकि संपत्ति को कारोबार, कृषि, शिक्षा या स्वास्थ्य के लिए बैंक ऋण लेने हेतु सिक्योरिटी के रूप में भी दिया जा सकता है। यह रिकॉर्ड पंजीकरण, हस्तांतरण और विरासत संबंधी दस्तावेजों में भी मददगार साबित हो सकता है, जिसमें प्रत्येक सह-स्वामी का हिस्सा दर्ज किया जाता है। इस दौरान ग्राम पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिए घरों, सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों के सही नक्शे मिल सकेंगे और प्रशासन को डिजिटाइज्ड तथा सटीक गांव के रिकॉर्ड प्राप्त होंगे।


