चंडीगढ़ , 24 अक्टूबर। हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि राखीगढ़ी की ऐतिहासिक धरती हमारी प्राचीन सभ्यता, ज्ञान, कौशल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। यहां मिले पुरातात्विक अवशेष हजारों वर्ष पुराने मानव जीवन और विकसित नगरीय व्यवस्था की जानकारी देते हैं। इस धरोहर का संरक्षण करना और इसके ऐतिहासिक महत्व को देश-दुनिया तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
कृष्ण लाल पंवार शनिवार को हांसी जिला के गांव राखीगढ़ी में आयोजित “अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव” के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने देश भर से आए तथा विदेश से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विशेषज्ञों को अपने शोध और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे राखीगढ़ी की ऐतिहासिक महत्ता को व्यापक स्तर पर समझने और प्रचारित करने में मदद मिलती है।
श्री कृष्ण लाल पवार ने आगे कहा कि हरियाणा की पहचान कृषि, खेल और देश की सेवा में जवानों के योगदान के साथ-साथ इसकी समृद्ध लोक संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों से भी है। प्रदेश की रागनियां, लोकगीत, पारंपरिक खानपान और ग्रामीण जीवन हमारी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। राखीगढ़ी इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को राखीगढ़ी जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करना चाहिए, ताकि वे पुस्तकों में पढ़े गए इतिहास को पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से बेहतर ढंग से समझ सकें।
इंटरनेशनल कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री के ओएसडी श्री भारत भूषण भारती, हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजेश ठकराल, हरियाणा वेयरहाउस कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्री रामकिशन, पुरातत्वविद डॉ कुलदीप अग्निहोत्री सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार साझा किए और राखीगढ़ी के महत्व के बारे में बताया।
इससे पहले विकास एवं पंचायत मंत्री श्री कृष्ण लाल पवार ने प्रदर्शनी स्टॉल तथा विभिन्न विभागों तथा उद्योग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी स्टालों का अवलोकन किया।
*डिप्टी स्पीकर श्री कृष्ण लाल मिढ़ा ने भी किया दौरा*
हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर श्री कृष्ण लाल मिढ़ा ने भी अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने राखीगढ़ी में उत्खनन के दौरान प्राप्त हड़प्पा सभ्यता की प्राचीन वस्तुओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही विभिन्न विभागों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर वहां प्रदर्शित उत्पादों एवं गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। स्टॉल संचालकों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि महोत्सव में स्वदेशी उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अपनाने के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे आयोजन स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार एवं बिक्री के लिए बेहतर मंच प्रदान करते हैं।
*मुख्यमंत्री के ओएसडी श्री भारत भूषण भारती ने भी रखे विचार*
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी श्री भारत भूषण भारती ने कहा कि प्रदेश सरकार राखीगढ़ी को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने और इसे प्राचीन सभ्यता एवं विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राखीगढ़ी हड़प्पा सभ्यता का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जिसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के माध्यम से इतिहास, पुरातत्व, कला, संस्कृति और जनभागीदारी को एक साझा मंच उपलब्ध करवाया जा रहा है।
*डेक्कन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने भी महोत्सव को सराहा*
डेक्कन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात पुरातत्वविद् डॉ. बसंत शिंदे ने अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान राखीगढ़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए इस महोत्सव के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता के लगभग 8,000 वर्ष पुराने होने के प्रमाण मिले हैं। नगरीय जीवन के शुरुआती विकास से लेकर सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक परंपराओं तक, इस सभ्यता का मानव इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के लोगों की जीवनशैली और परंपराओं से जुड़े अनेक पहलू आज भी हमारे समाज में दिखाई देते हैं।


