चंडीगढ़, 28 अक्टूबर। पंजाब को देश के ‘अन्न भंडार’ से वैश्विक ‘फूड प्रोसेसिंग हब’ में बदलने की जोरदार वकालत करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण तथा फूड प्रोसेसिंग मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने आज जैविक खेती, पैक-हाउसों, कोल्ड चेन और डेयरी तकनीक के क्षेत्र में निवेश के लिए यू.के. के निवेशकों को गर्मजोशी से आमंत्रित किया। उन्होंने ‘वेरका’ और ‘फाइव रिवर्स’ जैसे स्थानीय ब्रांडों को ब्रिटिश बाजार तक ले जाने की वकालत की।
कृषि मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां, जिनके साथ फूड प्रोसेसिंग विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी मौजूद थीं, ने यहां किसान भवन में ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस प्रतिनिधिमंडल में चंडीगढ़ स्थित ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एल्बा समेरीग्लो, ब्रिटिश हाई कमीशन के व्यापार संबंधी फर्स्ट सेक्रेटरी डॉ. निकोलस ग्रीबिट और वरिष्ठ व्यापार सलाहकार अनूप नारायण शामिल थे। बैठक के दौरान जैविक खेती, डेयरी, फसल अवशेष प्रबंधन और मानक प्रमाणन सहित अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए स. खुड्डियां ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में पंजाब के किसानों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा। इस संबंध में उन्होंने राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
गेहूं, बासमती, किन्नू, नाशपाती, लीची, दूध एवं डेयरी उत्पादों, बीज आलू और गाजर के उत्पादन के माध्यम से देश के अन्न भंडार के रूप में पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के पास फूड प्रोसेसिंग का बेहतरीन बुनियादी ढांचा मौजूद है। उन्होंने बताया कि नेस्ले (मोगा), हिंदुस्तान यूनिलीवर, आई.टी.सी. और अमूल जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ-साथ क्रेमिका, वेरका, सोहणा और फाइव रिवर्स (पैग्रेक्सको) जैसे घरेलू ब्रांडों का गढ़ होने के नाते अब पंजाब केवल कच्चे माल की आपूर्ति तक सीमित न रहकर राज्य के भीतर ही प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखता है।
उन्होंने कहा, “पंजाब के पास मजबूत कृषि आधार, स्थापित प्रोसेसिंग क्षमताएं, मान्यता प्राप्त ब्रांड और नवीन तकनीक आधारित उद्यमों का दिन-प्रतिदिन बढ़ता हुआ समूह है। पंजाब किन्नू, गाजर और रोग-मुक्त आलू बीज उत्पादन में प्रथम, नाशपाती में दूसरे तथा मटर और शहद उत्पादन में तीसरे स्थान पर है, जबकि प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1.28 लीटर दूध की उपलब्धता के साथ यह देशभर में शीर्ष स्थान पर है। हम इन क्षमताओं को यू.के. के बाजार की मांग, तकनीक, निवेश और विशेषज्ञता से जोड़ने की अपार संभावनाएं देखते हैं, जिससे कारोबारों को लाभ होगा और किसानों तथा फूड प्रोसेसिंग उद्यमों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।”
राज्य की आर्थिक मजबूती का उल्लेख करते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि कृषि और सहायक व्यवसाय पंजाब के ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडिशन (जी.एस.वी.ए.) में 27 प्रतिशत योगदान देते हैं, जबकि फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र ही पंजीकृत फैक्ट्रियों का 8 प्रतिशत और राज्य के पंजीकृत मैन्युफैक्चरिंग जी.एस.वी.ए. का 26.68 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि पंजाब केंद्रीय पूल में 47 प्रतिशत गेहूं और 37 प्रतिशत धान का योगदान देता है। इस ढांचे को 3,292 पंजीकृत फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों, 151 किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.), पी.एम.एफ.एम.ई. योजना के तहत 3,750 सूक्ष्म उद्यमों, तीन मेगा फूड पार्कों, 12 लाख मीट्रिक टन की कोल्ड स्टोरेज क्षमता और चार एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग प्रयोगशालाओं का समर्थन प्राप्त है।
निवेश के अवसरों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए स. खुड्डियां ने तकनीक हस्तांतरण और ब्रांड साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने राज्य सरकार के ब्रांड ‘वेरका’ और ‘फाइव रिवर्स’ को साझा लाभ वाले मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया, जहां पंजाब की प्रोसेसिंग क्षमता को यू.के. की तकनीक और बाजार तक पहुंच के माध्यम से लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ‘इन्वेस्ट पंजाब’ की ओर से यू.के. के निवेशकों को शुरुआत से लेकर अंत तक हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
कैबिनेट मंत्री ने यू.के. को पैक-हाउसों और प्री-कूलिंग सुविधाओं, कोल्ड-चेन कनेक्टिविटी, आधुनिक प्रोसेसिंग उपकरणों के लिए तकनीक हस्तांतरण और वैल्यू-एडिशन के माध्यम से किन्नू के छिलकों तथा उप-उत्पादों की उत्पाद नवाचार आदि में साझा बुनियादी ढांचे के लिए सहयोग का न्योता दिया। यू.के. बाजार में निर्यात के लिए किन्नू जूस कंसंट्रेट, शहद, मक्खन, पनीर और एस.एम.पी. सहित डेयरी उत्पाद तथा डिब्बाबंद राजमाह जैसी रेडी-टू-ईट वस्तुओं को संभावित उत्पादों के रूप में चिन्हित किया गया है।
भारत-यू.के. व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सी.ई.टी.ए.) के बारे में बोलते हुए श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी ने कहा कि यह समझौता पंजाब को प्रोसेस्ड फूड्स, बासमती, मसाले, शहद, अचार और किन्नू उत्पादों के लिए यू.के. की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है, जबकि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “शून्य टैरिफ यू.के. के साथ व्यापार का रास्ता खोलता है और हम यू.के. के उच्च गुणवत्ता तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी मानकों पर खरा उतरकर इसमें आसानी से आगे बढ़ सकते हैं; जिससे यू.के. के साथ हमारी साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।”
इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव कृषि एवं किसान कल्याण लतीफ अहमद, संयुक्त सचिव पंजाब मंडी बोर्ड हरजीत सिंह संधू, निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण गुरजीत सिंह बराड़, निदेशक पशुपालन परमदीप सिंह वालिया, पी.ए.यू. के निदेशक (अनुसंधान) डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


