बिना स्वामित्व प्रमाण के नहीं होगी रजिस्ट्री, सरकार का बड़ा फैसला
लखनऊ: 11 मार्च, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई। अब पंजीकरण से पूर्व खतौनी एवं अन्य स्वामित्व संबंधी अभिलेखों का अवलोकन एवं परीक्षण अनिवार्य होगा। इसके लिए अधिनियम की धारा-22 एवं 35 के उपरांत धारा-22A, 22B एवं 35A जोड़े जाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। यह विधेयक विधानमंडल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
प्रस्तावित धारा-22A विनिर्दिष्ट श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाएगी, जबकि धारा 22B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान अनिवार्य होगी। धारा 35A (1) के अनुसार यदि पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित स्वामित्व, अधिकार एवं विधिपूर्ण कब्जे से संबंधित दस्तावेज संलग्न नहीं हैं, तो पंजीकरण अधिकारी उन्हें पंजीकृत करने से इंकार कर सकेगा।
यह संशोधन भारतीय संविधान की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान में बिना स्वामित्व के संपत्ति का विक्रय, प्रतिबंधित संपत्ति का पंजीकरण तथा कुर्क या सरकारी संपत्तियों के विलेख पंजीकृत होने से विवादों की स्थिति बन जाती है, जिससे जनसामान्य को मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ता है। नए प्रावधानों से अनावश्यक कोर्ट केसों से राहत मिलेगी और शासन की छवि भी सुदृढ़ होगी।
अन्य राज्यों में इस प्रकार के संशोधन किए जा चुके हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश में भी यह निर्णय लिया गया है।

